कैडेवर डोनेशन से 90% लिवर ट्रांसप्लांट संभव — जयपुर में अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दी जानकारी
लिवर, हेपेटाइटिस व पैंक्रियाटो-बिलियरी सर्जन्स की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (IHPBA-2026) गुरुवार से जयपुर में शुरू हुई। कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. मनीषा एम. मित्तल ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब लगभग 90 प्रतिशत लिवर ट्रांसप्लांट कैडेवर (मृत दाता) डोनेशन के माध्यम से किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले लिवर ट्रांसप्लांट के लिए जीवित डोनर पर अधिक निर्भरता रहती थी, लेकिन अब मृत दाताओं से अंगदान की जागरूकता बढ़ने के कारण मरीजों को समय पर लिवर उपलब्ध हो पा रहा है।
सम्मेलन में देश-विदेश से आए सर्जनों, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर द्वारा किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस, लिवर कैंसर और अन्य गंभीर लिवर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट जीवनरक्षक उपचार है। कैडेवर डोनेशन से मरीजों की प्रतीक्षा अवधि कम हुई है और सफलता दर भी बढ़ी है।
कॉन्फ्रेंस में प्रिसिजन सर्जरी, लिवर सर्जरी, पैंक्रियाटाइटिस, बाइल डक्ट इंजरी, गॉलब्लैडर कैंसर, रोबोटिक सर्जरी और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। देश के साथ-साथ अमेरिका, जापान, सिंगापुर सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए।
डॉक्टरों ने कहा कि एक अंगदाता कई मरीजों को नया जीवन दे सकता है, इसलिए लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक होना चाहिए और ब्रेन-डेथ की स्थिति में अंगदान के लिए आगे आना चाहिए।